वक्त

गुजरते देखा है जिंदगी को इतना करीब सेवो ना आया जब मिलने का वक्त आया मोहलत मांग लेते हम उससे मगरजिंदगी में तनहाई निभाने का वक्त बेवक्त आया क्या खूब कहा था उसने वफ़ा के लिएउसके झूठ पर जाम पीने का मजा आया गजब का तौबा किया था उसने जबहमारे नाम के आगे उसका नाम… Continue reading वक्त

ज़माने

जिंदगी नही मिली पर जिंदा हूं मैं आसमान का टूटा हुआ परिंदा हूं मैं लोग पीते रहे खुशनुमा महफिलों में महफिलों से भी तो शर्मिंदा हूं मैं। इस कदर पत्ते शाखों से टूट जाते थे जैसे सिर्फ फूलों की खुशबुओं का इंतजार हो कफन भी ना भीग पाए अश्कों से जहां ऐसे बेदर्द ज़माने का… Continue reading ज़माने

ख़याल

बात तो अब बहुत पुरानी है इक खोए हुए वक्त की रवानी है बहता था वो शख़्स हर उस हवा की साथ पहुँचाती जो भी उसकी फ़रियाद दूआओं के साथ के बस परिन्दों-से ख़याल मिलें ख़ाली आसमानों में उड़ते उड़ते वरना रख़ा ही क्या है ज़मीन की मोहब्बतों के साथ।